Download App from

Follow us on

मजबूती के साथ सबको लेकर आगे बढ़ रही कांग्रेसः पवन गुप्ता

Spread the News
  • कानपुर महानगर उत्तर कांग्रेस के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने दीनार टाइम्स से की एक्सक्लुसिव बातचीत

अंजनी निगम, डीटीएनएन

कानपुर , जन्मजात कांग्रेसी होने के बाद भी बसपा के टिकट पर 1998 का लोकसभा चुनाव लड़ चुके पवन गुप्ता की 2003 में घर वापसी हुई। वनस्पति की रिफाइनरी और कोयला कारोबारी रहे पवन गुप्ता के पिता राम बिलास गुप्ता 1971 से 1981 यानी 10 सालों तक कांग्रेस कमेटी में रहे जब केवल 15 लोगों की कार्यकारिणी हुआ करती थी। 2003 में कांग्रेस में वापसी के चार साल के भीतर ही पवन गुप्ता ने आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा हालांकि हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद 2008 से 2011 तक उद्योग मंत्रालय के अधीन खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सलाहकार समिति के चेयरमैन रहे पवन को पार्टी ने 2012 में महापौर का प्रत्याशी भी बनाया जब भाजपा के पूर्व सांसद जगतवीर सिंह द्रोण जीते थे। महानगर अध्यक्ष बनने के पहले तक प्रदेश कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के चेयरमैन रहे। दीनार टाइम्स के समाचार संपादक से विशेष बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है। महानगर इकाई में पांच विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें से तीन आर्यनगर, सीसामऊ और कैंट पर सपा काबिज है जबकि गोविंद नगर और किदवई नगर क्षेत्र भाजपा के पास हैं। प्रस्तुत हैं उनसे हुई वार्ता के प्रमुख अंश |

प्रश्न – 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की कैसी तैयारी चल रही है ?
उत्तर – कांग्रेस जन समस्याओं जैसे बिजली, पानी, जल भराव, टूटी सड़कें आदि मुद्दों पर संघर्ष कर रही है, हर दूसरे दिन धरना प्रदर्शन के माध्यम से नए और पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को जोड़ा जा रहा है जिसके सार्थक परिणाम आने की पूरी उम्मीद है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैंट सीट से कांग्रेस जरूर जीती थी किंतु 2022 में यह सीट भी सपा के खाते में चली गयी थी। वैसे तो चुनावी गठबंधन का निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व को लेना है लेकिन कांग्रेस और सपा के नेताओं के कथन के अनुसार कांग्रेस को गोविंद नगर और किदवई नगर सीट मिलेगी जिस पर पार्टी का ज्यादा फोकस है। गठबंधन न होने की स्थिति में पांचों सीटों पर पार्टी लड़ेगी।

प्रश्न – संगठनात्मक ढांचा भी छिन्न-भिन्न सा है, जिन लोगों को आपने पदाधिकारी बनाया उनमें से कई ने पद छोड़ दिए ?
उत्तर – हां यह सच है कि कुछ लोगों ने पद स्वीकार करने के पहले ही छोड़ने की पेशकश की क्योंकि जिन्हें सचिव बनाया गया था वे महामंत्री या उपाध्यक्ष बनना चाहते थे। दसअसल प्रदेश नेतृत्व ने कहा था कि अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को समायोजित करना है, अधिकांश कार्यकर्ता तो स्थितियां समझ कर मान गए किंतु जिन लोगों छोड़ा है वह सब निगेटिव मानसिकता के लोग थे।

प्रश्न – बीते साल लोकसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेता आलोक मिश्रा ने राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने विरोध में बयान दिया, क्या प्रभाव रहा ?
उत्तर – उनके बयान का कोई असर नहीं रहा। जहां तक परिवार में बेटों की बात है, बड़ा बेटा कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ में 2020 प्रदेश उपाध्यक्ष है। एक बेटा वैश्य संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष है और इस नाते उसके पास सभी दलों के लोग मिलने जुलने आते जाते हैं।

प्रश्न – छोटे बेटे को लेकर चर्चा है कि वह सपा में है फिर भी आपने किदवई नगर से संभावित पैनल में नाम भेज दिया, क्या है हकीकत ?
उत्तर – यह बात भी कांग्रेस के उन लोगों उड़ाई है जो मुझे अध्यक्ष के रूप में नहीं देखना चाहते हैं। अभी तक न तो पार्टी ने कोई पैनल मांगा है और न ही मैंने अपनी तरफ से भेजा है। हां पार्टी ने हर विधानसभा क्षेत्र से सामाजिक, और राजनीतिक प्रभावशाली 10-10 लोगों की सूची जरूर मांगी थी। इन प्रभावशाली लोगों में दूसरे दलों से चुनाव लड़े लोगों के नाम भी शामिल किए हैं |

> Related News