जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा और खुशी के साथ मनाया जा रहा है। यह वो समय है जब आस्था, परंपरा और जश्न का सुंदर मेल दिखाई देता है। इस मौके पर ‘जागृति – एक नई सुबह‘ के विजयेंद्र कुमेरिया, ‘तुम से तुम तक‘ की निहारिका चौकसे, ‘सरू‘ की मोहक मटकर, जमाई नं. 1 के अभिषेक मलिक, वसुधा की परिणीता बोरठाकुर और ‘जाने अनजाने हम मिले‘ की आयुषी खुराना जैसे ज़ी टीवी के कलाकार अपनी जन्माष्टमी की यादें और कुछ दिलचस्प किस्से ताज़ा कर रहे हैं।
‘जागृति – एक नई सुबह’ में सूरज का किरदार निभा रहे विजयेंद्र कुमेरिया कहते हैं,
‘‘जन्माष्टमी हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रही है। मुंबई में रहता हूं, जहां यह त्योहार बहुत जोश के साथ मनाया जाता है, तो हर साल इसका इंतजार रहता है। समय के साथ मेरा जन्माष्टमी से रिश्ता सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं रहा, यह मेरे लिए खुशी, आस्था और अपनापन बन गया है।’
‘तुम से तुम तक’ में अनु का किरदार निभा रहीं निहारिका चौकसे कहती हैं, ‘‘मेरे लिए जन्माष्टमी हमेशा बचपन की मीठी यादें लेकर आती है। मुंबई में दही हांडी बहुत उमंग से मनाई जाती है, लेकिन घर पर हम इसे सादगी से मनाते हैं, पूजा करते हैं, मंदिर सजाते हैं और प्रसाद बनाते हैं। चाहे मैं कहीं भी रहूं, ये परंपराएं जन्माष्टमी को घर जैसा अहसास कराती हैं।
‘सरू’ में सरू का किरदार निभा रहीं मोहक मटकर कहती हैं, ‘‘कुछ त्योहार हमारी जिंदगी की सबसे खुशी भरी यादें बन जाते हैं और मेरे लिए जन्माष्टमी उन्हीं में से एक है। इस साल खास तौर पर खुशी है क्योंकि अपने शो ‘सरू‘ में मैं राधा का किरदार कर रही हूं, जो जन्माष्टमी की सच्ची भावना और खुशी को और जीवित करेगा।
‘जाने अनजाने हम मिले’ में रीत का किरदार निभा रहीं आयुषी खुराना बताती हैं, ‘‘जन्माष्टमी हमेशा मेरे दिल में खास जगह रखती है। यह खुशी, भक्ति और सुकून का सुंदर मेल है। बचपन में मुझे याद है कैसे मेरे माता पिता मुझे आधी रात को मंदिर लेकर जाते थे। मुंबई में जन्माष्टमी मनाना अलग तरह की खुशी देता है, मंदिरों की जगमगाहट, गलियों में भजन की धुन और दही हांडी का उत्साह कुछ और ही होता है। मेरे लिए जन्माष्टमी सिर्फ त्योहार नहीं, एक अहसास है, जो दिल को सुकून देता है और अंदर के बच्चे को जिंदा रखता है।
‘जमाई नं. 1’ में नील का किरदार निभा रहे अभिषेक मलिक कहते हैं, ‘‘जन्माष्टमी मेरी कई प्यारी बचपन की यादें ताजा कर देती है। एक बार स्कूल में नन्हे कृष्ण का भेष किया था और मेरी मां आज भी गर्व से वे तस्वीरें दिखाती हैं। मेरे लिए जन्माष्टमी खुशी, भक्ति और रोजमर्रा की जिंदगी के बीच सुकून के पल खोजने का जरिया है।
‘वसुधा’ में ‘चंद्रिका’ का किरदार निभाने वालीं परिणीता बोरठाकुर कहती हैं, ‘‘जन्माष्टमी मेरे लिए बहुत खास है। हर साल मैं इसे घर पर अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ मनाती हूं। समय के साथ मेरा भगवान कृष्ण से जुड़ाव और गहरा हुआ है। घर में एक छोटा कान्हा रखा है, पारंपरिक लड्डू गोपाल नहीं है पर उनकी उपस्थिति सुकून देती है। मेरे लिए जन्माष्टमी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि खुद से, अपने प्रियजनों से और भगवान कृष्ण से जुड़ने का समय है।