कानपुर। 24 वर्ष बाद मंगल और गुरु की युति एक बार फिर कर्क राशि में बनने जा रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार 18 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 के बीच बनने वाली यह युति कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत दे रही है। इससे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव आने की संभावना जताई गई है।
इससे पहले जुलाई-अगस्त 2002 में मंगल और गुरु कर्क राशि में साथ आए थे। उस समय देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उस अवधि में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम देखने को मिले थे।
इसी संदर्भ में पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेस, आर्य नगर में मंगल-गुरु की युति और उसके प्रभाव पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें ज्योतिषविदों ने युति की शांति तथा सकारात्मक प्रभाव के लिए मंगल और गुरु के मंत्र-जप की बात कही।
संगोष्ठी में आचार्य स्वाती सक्सेना, आचार्य पंडित ए.के. द्विवेदी, युवा ज्योतिषी शिवम गौतम और आचार्य मधुसूदन शर्मा ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित के.ए. दुबे पद्मेश ने की। आयोजकों के अनुसार 31 अक्टूबर तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे।