-भारतीय संस्कृति में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व, मां दुर्गा की आराधना से मिलता है शक्ति, साहस और सकारात्मकता का संदेश
तिरंगा अगरबत्ती के निदेशक और समाजसेवी पंडित नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व मां दुर्गा की उपासना, शक्ति की आराधना और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। आश्विन मास में मनाए जाने वाले नौ दिवसीय इस महापर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। देशभर में नवरात्र को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
नवरात्र के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करते हैं। पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दुर्गा सप्तशती के पाठ से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
इस पर्व का धार्मिक महत्व जितना गहरा है, उतना ही इसका सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी महत्वपूर्ण है। मां दुर्गा को शक्ति, साहस और नारी सम्मान का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र हमें सिखाता है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ करना चाहिए।
तिरंगा अगरबत्ती के निदेशक और समाजसेवी पंडित नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि यह पर्व महिलाओं के सम्मान, सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है।
देश के विभिन्न हिस्सों में नवरात्र अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल आकर्षण का केंद्र बनते हैं, जबकि गुजरात में गरबा और डांडिया की धूम रहती है।
उत्तर भारत में मंदिरों की सजावट, जागरण और धार्मिक आयोजनों की विशेष रौनक दिखाई देती है।
शारदीय नवरात्र केवल पूजा और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करने और अच्छे विचारों को अपनाने का अवसर भी है। मां दुर्गा की आराधना हमें सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यही इस महापर्व का वास्तविक संदेश है कि शक्ति का उपयोग सदैव लोककल्याण और धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए।