कोपेस्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने दीनार टाइम्स से की एक्सक्लुसिव बातचीत
अंजनी निगम, डीटीएनएन
कानपुर , दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया में 17 सितंबर 2022 को एमएसई-सीडीपी योजना के तहत कानपुर में एमएसएमई उद्यमियों की सुविधा के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के कैबिनेट मंत्री कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, तत्कालीन सांसद सत्यदेव पचौरी और विधायक सुरेन्द्र मैथानी, उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के प्रबंध निदेशक राम यज्ञ मिश्र, उद्योग निदेशक एवं आयुक्त मयूर माहेश्वरी और प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर सचिव अमित मोहन प्रसाद की उपस्थिति में किया गया। कोआपरेटिव इंडस्ट्रियल इस्टेट दादानगर के चेयरमैन विजय कपूर का कहना है कि अब पूरा भवन भी तैयार हो चुका है और यहीं पर बने 165 फैक्ट्रियों के स्थान में से 70 फीसद होजरी के अलावा इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और यहां तक कि कुछ प्रापर्टी डीलरों और ट्रेडरों को भी स्थान आवंटित कर दिया गया है जबकि सपना दिखाया गया था कि यहां पर होजरी सिलाई हब बनेगा। लेकिन वह सपना तो अधूरा ही रह गया। प्रस्तुत हैं उनसे वार्ता के बिंदु …..
प्रश्न – दादा नगर में फ्लैटेड फैक्ट्रियां बनी हैं इसका क्या और कितना लाभ उद्योग जगत को मिलने वाला है ?
उत्तर – इन फैक्ट्रियों को जिस उद्देश्य से बनाया गया था जब वही नहीं पूरा हो सका है तो इनका जो लाभ मिलना चाहिए वो पूरा नहीं मिल सकेगा। दरअसल जब फ्लैटेड फैक्ट्री खोलने का कॉन्सेप्ट आया तभी मुख्यमंत्री कार्यालय से तत्कालीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सूचना पर्यटन एवं एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल का फोन आया और उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है, इसमें आप पूरा सहयोग करें। उनके फोन आने पर हमने और जेट निटवियर प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रमुख होजरी उद्यमी बलराम नरूला ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, यह तो हम लोगों के लिए भी बहुत सौभाग्य की बात होगी क्योंकि हम लोग को लंबे अरसे से कानपुर को होजरी हब बनाने की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न – फ्लैटेड फैक्ट्री में क्या होजरी हब का सपना पूरा हो सका ?
उत्तर – कानपुर में अभी होजरी उद्योग फुटकर-फुटकर में है इसीलिए लंबे अरसे से यहां पर होजरी हब बनाने की मांग की जा रही थी क्योंकि कानपुर में आजादी के पहले से होजरी काम होने के बाद भी कोलकाता (पश्चिम बंगाल) और तिरुपुर (तमिलनाडु) वहां की सरकारों का सहयोग मिलने से होजरी उद्योग में बहुत आगे जा चुके हैं। यदि यहां भी सरकार के सहयोग से होजरी हब बन गया तो निश्चित रूप से इस उद्योग को कानपुर में चार चांद लग जाएंगे। उम्मीद थी कि एक ही स्थान पर सारे होजरी सिलाई वाले आ जाएंगे तो उनका विकास हो सकेगा।
प्रश्न – होजरी हब बनाने के लिए आप लोगों ने क्या प्रयास किए ?
उत्तर – होजरी के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री की सूचना पाते ही हम लोगों ने बलराम नरूला जी के सहयोग से होजरी से संबंधित निटिंग से लेकर पैकिंग वालों की एक मीटिंग बुलाई और सबकी सहमति से 165 उद्यमियों की लिस्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश लघु उद्योग विभाग के अधिकारियों को सौंप दी। उनके एमडी भी आए तो उनसे निवेदन किया कि इन लोगों को आप रियायती दरों पर फैक्ट्रियां आवंटित करें ताकि यह लोग अपना उद्योग स्थापित कर कानपुर के होजरी उद्योग को विश्व स्तरीय बना सकें। उसी समय यूपीएसआईसी के अधिकारियों ने बताया कि हमने तो इसकी रजिस्ट्री ही नहीं कराई है और बिना रजिस्ट्री कराए विभिन्न उद्यमियों को कैसे रजिस्ट्री कर सकेंगे।
प्रश्न -इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने क्या एक्शन लिया ?
उत्तर – मुख्यमंत्री कार्यालय से फिर अधिकारियों का फोन आया कि आप रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं। मैंने कहा ये सारे कागज लेकर आ जाएं, रजिस्ट्री दो मिनट में कर दी जाएगी। इसके साथ ही हमने फिर दोहराया कि यहां पर होजरी का क्लस्टर बन रहा है इसलिए आप होजरी उद्यमियों को सस्ती दर पर ही स्थान दें क्योंकि आपका कोई पैसा तो रजिस्ट्री में लग नहीं रहा है। अधिकारियों ने कहा कि उनके पास तो जमीन संबंधी कोई कागज नहीं हैं। जबकि इस्टेट ने यूपीएसआईसी को 1962-63 में 7500 वर्ग गज जगह दी थी तब यहां पर फैक्ट्रियों के लिए लोहा आदि उपलब्ध कराया जाता था क्योंकि तब लोहा सहित कुछ अन्य चीजों में लाइसेंसिंग थी। बाद में वह खत्म हो गयी और उद्यमी मार्केट से सीधे लेने लगे तो यूपीएसआईसी का यह स्थान खाली पड़ा रहा। मैंने इस्टेट से पुरानी फाइलें निकलवा कर उन्हें फिर से कागज सौंपे और 2022 में रजिस्ट्री की।
प्रश्न – तो क्या उद्यमियों को फ्लैटेड फैक्ट्री आवंटन में कोई सब्सिडी मिली ?
उत्तर – बिल्कुल भी नहीं, अधिकारियों ने मनमानी करते हुए उद्यमियों को मार्केट रेड पर आवंटन करना शुरु कर दिया और होजरी क्लस्टर की बात तो भूल ही गए। हम लोगों ने इस पर आपत्ति भी व्यक्त की लेकिन इन्होंने तेवर ही बदल दिए और 165 लोगों की सूची को दर किनार कर दिया। अब बिल्डिंग तो चार मंजिला बन गयी है। यदि अधिकारियों की मंशा पता होती है तो होजरी क्लस्टर के लिए उनके साथ विधिवत लिखापढ़ी कर लेते। इस मामले में अक्सर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल का फोन आता रहा वो हर बार सहमति जताते रहे। अभी भी जो बची हुई फैक्ट्री हैं उन्हें होजरी सिलाई वालों को रियायती दरों पर देकर सरकार उद्यमियों के आंसू पोछने का कार्य कर सकती है।