‘फर्स्ट अप्रैल’ यानी अप्रैल फूल डे… एक ऐसा दिन जो पूरी तरह मस्ती, मज़ाक और शरारती ट्रिक्स के नाम होता है। सदियों से इसे हर संस्कृति में हंसी-मज़ाक और हल्की-फुल्की शरारतों के ज़रिए मनाया जाता रहा है। ज़ी टीवी के कुछ सबसे चहेते सितारों ने अपने सबसे यादगार अप्रैल फूल डे प्रैंक्स के किस्से शेयर किये।
‘भाग्य लक्ष्मी‘ में लक्ष्मी का किरदार निभा रहीं ऐश्वर्या खरे ने कहा, ‘‘अप्रैल फूल्स डे वो दिन होता है, जब अपने सबसे करीबी दोस्त पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता! अप्रैल फूल्स डे की सबसे अच्छी बात यही है कि यह सिर्फ मस्ती और मज़ाक का दिन होता है, जो हमें और करीब लाता है।’’
‘कैसे मुझे तुम मिल गए‘ में मानवी का किरदार निभा रहीं आकांक्षा चमोला ने कहा, ‘‘अप्रैल फूल्स डे आते ही मैं आसपास के हर इंसान पर शक करने लगती हूं! मैंने एक बात समझी है कि सबसे बेहतरीन शरारतें तभी होती हैं, जब कोई उनकी उम्मीद ही न करे! इसलिए मैं अप्रैल फूल्स डे से पहले या बाद में शरारतें करने में यकीन रखती हूं। अंत में, सबका मकसद बस हंसी और खुशी फैलाना ही होता है। तो खूब हंसिए, थोड़ा शरारती बनिए और एक शानदार अप्रैल फूल्स डे का मज़ा लीजिए!‘‘
‘जागृति – एक नई सुबह‘ में कालीकांत का किरदार निभा रहे आर्य बब्बर ने कहा, ‘‘प्रैंकिंग तो मेरे खून में बसी है! सच कहूं तो अप्रैल फूल डे तो बस एक बहाना है, मैं तो साल भर यही करता हूं! ऑन-स्क्रीन भले ही मैं बेरहम कालीकांत का रोल निभा रहा हूं, लेकिन ऑफ-स्क्रीन मेरी ज़िंदगी मस्ती और हंसी-मज़ाक के लिए बनी है!‘‘
‘कुमकुम भाग्य‘ में रौनक का किरदार निभा रहे अक्षय देव बिंद्रा ने कहा, ‘‘मैं बचपन से ही शरारती रहा हूं! स्कूल के दिनों में मैं वही बच्चा था, जो दोस्तों की पीठ पर ‘किक मी‘ वाले नोट्स चिपकाता था या फिर व्हाइटबोर्ड के मार्कर को इनविज़िबल इंक से बदल देता था। इस अप्रैल फूल्स डे पर आइए, शरारतों की मस्ती बनाए रखें और हंसते-हंसाते रहें!‘‘
‘जाने अनजाने हम मिले‘ में राघव का किरदार निभा रहे भरत अहलावत ने कहा, ‘‘हमारे सेट पर तो हर दिन अप्रैल फूल्स डे जैसा ही लगता है, क्योंकि हर वक्त कोई न कोई शरारत होती रहती है! मुझे दूसरों से प्रैंक करना पसंद है, लेकिन खुद भी कई बार शिकार बन चुका हूं। इस 1 अप्रैल को सरप्राइज़ का मज़ा लीजिए, हंसते-हंसाते रहिए और हां, सतर्क भी रहिए!‘‘
‘वसुधा‘ में वसुधा का किरदार निभा रहीं प्रिया ठाकुर ने कहा, ‘‘अप्रैल फूल्स डे मेरे लिए सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक परंपरा है – या यूं कहें, शरारतों का त्यौहार! बचपन से ही मैं और मेरे दोस्त हल्की-फुल्की, लेकिन बेहद चालाक शरारतें करते आए हैं… कभी चीनी की जगह नमक डालना, तो कभी कोई अनोखा सरप्राइज़ प्लान करना।’’