- तिरंगा अगरबत्ती के निदेशक और समाजसेवी पंडित नरेंद्र शर्मा बता रहे हैं कजरी तीज का विशेष महत्व
तिरंगा अगरबत्ती के निदेशक और समाजसेवी पंडित नरेंद्र शर्मा बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार कजरी तीज व्रत कथा के अनुसार एक गांव में गरीब ब्राह्मण का वास था…उसकी हालत दयनीय थी कि वह दो वक्त का भोजन कर पाता था |
ऐसे में एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखने का संकल्प लिया और अपने पति से व्रत के लिए चने का सत्तू लाने को कहा| यह बात सुनकर ब्राह्मण परेशान हो गया कि आखिर उसके पास इतने पैसे तो है नहीं, फिर वह सत्तू कहां से लेकर आए | ऐसे में पत्नी बोली कि चाहे चोरी करो या फिर डाका डालो, लेकिन मेरे लिए सत्तू लेकर आओ|ऐसे में ब्राह्मण साहुकार की दुकान पर पहुंचा… जब वहां पहुंचा, तो उसने देखा कि साहुकार के साथ-साथ उसके सभी नौकर सो रहे थे|
ऐसे में ब्राह्मण चुपके से दुकान में चला गया सत्तू लाने लगा | ऐसे में उसकी आहट से हुई, जिससे नौकरों की नींद खुल गई है वह चोर-चोर शोर मचाने लगें |ऐसे में साहुकार की नींद खुल गई और उसने ब्राह्मण को देख लिया | उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया | ब्राह्मण ने तब कहा कि वह चोर नहीं है और केवल सवा किलो सत्तू लेकर जा रहा है|
ब्राह्मण ने बताया कि उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत किया है और उसके लिए पूजा सामग्री चाहिए इसलिए उसने केवल सत्तू लिया है… यह सुनकर साहुकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली, तो उसके पास सही में कुछ नहीं मिला… साहुकार की आंखें नम हो गई…उसने ब्राह्मण से कहा कि अब से उसकी पत्नी को वह बहन मानेगा…इसके बाद साहुकार ने ब्राह्मण को पैसे, मेहंदी, सत्तू सहित सामान देकर अच्छे से विदा किया… कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और पति की आयु लंबी होती है|