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दुनिया को “असली सच” बताने के लिए भेजे गए सबूतः सूबेदार जय मूर्ति सिंह यादव

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अंजनी निगम, डीटीएनएन_

कानपुर , भारतीय सेना की मेडिकल कोर में पहली अक्टूबर 1984 को सिपाही के रूप में भर्ती होने वाले जय मूर्ति सिंह यादव सिपाही से नायक, हवलदार आदि पदों पर होते हुए 30 सितंबर 2012 को जेसीओ सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए. सेवाकाल की बातों को कुरेदने पर वे 1999 के कारगिल युद्ध की याद करते हैं जो जुलाई माह में हुआ था. उस समय वे ग्वालियर में तैनात थे और युद्ध का बिगुल बजते ही 87 फर्स्ट आर्मर्ड से संबद्ध हॉस्पिटल के साथ पोखरन पहुंचे और भारतीय सेना के साथ थे दुश्मन की सीमा तक घुस गए थे.


दूसरी घटना को ऐतिहासिक बताते हुए वे कहते हैं, बात 15 जुलाई 2001 की है, जब पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुसर्रफ और भारत के प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बीच आगरा में वार्ता होनी थी. आतंकी संगठन इस वार्ता के खिलाफ थे और विफल करने की धमकी दी थी. वार्ता के समय सूबेदार जय मूर्ति 24 राष्ट्रीय राइफल्स में जम्मू कश्मीर में तैनात थे. आतंकियों ने कंपनी पर हमला किया जिसमें चार जवान शहीद और नौ घायल हुए थे. ऐसे में मेडिकल कोर ने मुस्तैदी से घायलों की प्राथमिक चिकित्सा कर उन्हें सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया और शहीदों को उनके घर तक पहुंचाने के कार्य में सहयोग किया. पेश है सूबेदार जय मूर्ति सिंह यादव से वार्ता के अंश.

प्रश्न – ऑपरेशन सिंदूर के मामले में पाकिस्तान लगातार झूठ बोलता रहा है, अब उसने हल्का नुकसान स्वीकार किया है, उसकी इस मानसिकता पर आपको क्या कहना है ?


उत्तर – ऑपरेशन सिंदूर ने अभी जो टारगेट तय किया था, उसे सेना के जवानों ने बहुत ही आसानी से पूरा किया. पहले तो पाक नहीं मान रहा था किंतु बाद में स्वीकार किया कि उसके 21 जवान मारे गए. भारतीय सेना खुद कह ही नहीं रही बल्कि सबूत भी दे रही है, सेना ने आतंकी ठिकानों पर ही हमला किया और न जाने कितने आतंकियों को मार गिराया.

प्रश्न – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ का कहना है कि अभी जो कुछ हुआ वह तो ट्रेलर था, पूरी पिक्चर अभी बाकी है. इसी तरह विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 70 देशों को इस घटना के सबूत भेज कर बात भी की है. इसे किस रूप में देखना चाहिए ?


उत्तर – इस तरह के बयान हमारे नेता इसीलिए दे रहे हैं क्योंकि दुश्मन को कभी कम करके नहीं आंकना चाहिए, जहां तक अन्य देशों को ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित सबूतों को देने का सवाल है, हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि भारत ने पाकिस्तान के उन्हीं ठीकानों को निशाना बनाया है जहां से आतंकी घटनाओं का संचालन हो रहा था या फिर भारत के अंदर मिसाइल हमले किए जा रहे थे. भारत जो कर रहा है वह सही कर रहा है यह मानवाधिकार सहित सभी को साफ साफ पता लगना चाहिए, यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पाकिस्तान की आदत ही झूठ बोलने की है.


प्रश्न – दोनों देशों के रक्षा विभाग के डीजीएमओ स्तर की वार्ता 18 मई को होनी है, इस पर आप कुछ कहना चाहेंगे ?


उत्तर – देखिए, वार्ता होना अलग विषय है, यह तो होना ही चाहिए लेकिन उसके परिणामों के लेकर बहुत उत्साहित नहीं होना क्योंकि वार्ताएं तो कई बार हो चुकी हैं और परिणाम सबके सामने हैं. हमें अपनी तैयारियों में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतनी है. हमारे ढीले होते ही वो फायदा उठा लेते हैं क्योंकि वे तो इसी फिराक में रहते हैं.

प्रश्न – आम जनता के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे ?


उत्तर – आम जनता को अफवाहों से सावधान रहते हुए सोशल मीडिया में आने वाली पोस्टों को बिना सोचे समझे फॉरवर्ड कर स्थिति को पैनिक होने से बचाएं. सेनाएं अपना कार्य कर रही हैं, आप सुरक्षित हैं.

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