- उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की हाई कोर्ट में हुई बड़ी जीत, डुप्लीकेट यूपीसीए की याचिका की ख़ारिज
- डुप्लीकेट यूपीसीए को मिला बड़ा झटका, कई मांगों को हाईकोर्ट ने किया ख़ारिज
- यूपीसीए मीडिया कमेटी के चेयरमैन संजय कपूर ने इस फैसले को बताया सत्य की जीत विशाल अवस्थी, कानपुर
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को एक बड़ी जीत हासिल हुई है|
आगरा में बनी डुप्लीकेट उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को बड़ा झटका लगा है… डुप्लीकेट उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन यानि सीएयूपी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें असली उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर कई बड़े आरोप लगाए थे जिसको इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है… हाई कोर्ट ने सभी मुद्दों पर विचार करने के बाद इसे आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया…सीएयूपी का स्वयं को उत्तर प्रदेश की आधिकारिक अथवा मान्यता प्राप्त विकेट संस्था के रूप में प्रस्तुत करना फर्जी और भ्रामक है|
द क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश को उत्तर प्रदेश में अधिकारी क्रिकेट गतिविधियां संचालित करने के लिए बीसीसीआई से कोई संबद्धता प्राप्त नहीं है… इसके बावजूद द क्रिकेट एसोसिएशन आफ उत्तर प्रदेश की ओर से उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से मिलता जुलता नाम इस्तेमाल कर से हमको प्रदेश की मान्यता प्राप्त क्रिकेट संस्था के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है… हाई कोर्ट ने कहा कि लगभग 21 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को इतने लंबे समय बाद बदला नहीं जा सकता, हाईकोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप का कोई उचित आधार नहीं पाया और कहा कि इस बात को आप समाप्त किया जाना चाहिए|
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन हाई कोर्ट के इस निर्णय का सम्मानपूर्वक स्वागत करता है… यह निर्णय उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की कानूनी स्थिति और उत्तर प्रदेश में टिकट के संचालन की स्थापित व्यवस्था को स्पष्ट करता है… उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन प्रदेश के सभी 75 जिलों में क्रिकेट के विकास प्रतिभा सिंह खिलाड़ियों को समान अवसर देने और उत्तर प्रदेश क्रिकेट को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है…
ये सत्य की जीत|
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन मीडिया कमेटी के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने कहा कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह निर्णय सत्य और यूपीसीए की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करता है… सीएयूपी द्वारा यूपीसीए से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल कर स्वयं को प्रदेश की मान्यता प्राप्त क्रिकेट संस्था के रूप में प्रस्तुत करना फर्जी और भ्रामक है…इससे खिलाड़ियों, जिला क्रिकेट संघों और आम जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया है|
न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यूपीसीए का गठन, पुरानी सोसाइटी की संपत्तियों एवं दायित्वों का हस्तांतरण तथा बीसीसीआई से उसकी संबद्धता स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है… अब इस विवाद को समाप्त कर सभी को उत्तर प्रदेश क्रिकेट और खिलाड़ियों के विकास के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए…डॉ संजय कपूर ने कहा कि ये उत्तर प्रदेश के एसोसिएशन के लिए बड़ी जीत है… उत्तर प्रदेश में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन अनवरत गति से कार्य कर रही है और करती रहेगी