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सिंधु महोत्सव 6 अप्रैल को, दिखेगी संस्कृति व लोकनृत्य की झलक

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डीटीएनएन
कानपुर। भारत के भवन में त्याग व बलिदान की अनगिनत अस्थियों से निर्मित सारे वेदों की रचना सिन्धु नदी के किनारे ही हुई। सिन्धु से ही हिन्द शब्द का आगाज हुआ। सिन्धु घाटी की सभ्यता सबसे प्राचीनतम सभ्यता है जब भाषा के आधार पर प्रान्तों का बंटवारा हुआ, तब सिन्धी समाज ने कहा कि हम पूरे भारत में रहकर आर्थिक आजादी दिलायेंगे और इस दिशा में सार्थक प्रयास ही नहीं बल्कि पूर्णतः आर्थिक आजादी दिलायी।


6 अप्रैल रविवार मोतीझील प्रांगण में उत्तर भारत का सिन्धु महोत्सव 23वीं पायदान पर स्थापित हो रहा है। यह महोत्सव सेवा, संस्कृति व सहकार की भावना से ओत-प्रोत है। पाश्चात्य की संस्कृति को कुचलने का सप्रयास भी किया जा रहा है जिसमें सुप्रसिद्ध बम्बई के कलाकार अजय मुकेश, प्रियंका केसवानी, किरन वासवानी व भावना वैशाला वृन्दावन, दिल्ली के कलाकार जनमानस को मंत्रमुग्ध करेंगे।

भगवान झूलेलाल की जयन्ती के पावन पर्व के उपलक्ष्य में सिन्धी नृत्याँगनायें भारतीय संस्कृति का श्रृंगार करेंगी और सिन्धी व्यंजनों के स्टाल जबान को अनूठा स्वाद देंगे। सिन्धी लोकनृत्य एवं ढोकला नृत्य की प्रतिस्पर्धा भी करायी जायेगी। प्रेसवार्ता में मोहन रामचंदानी, जय हेमराजानी, महेश मेघानी, लाल चंद, नरेश, रौनक आदि मौजूद रहे।

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